कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1107

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सिर्फ लिख देती तुम्हें तो

सिर्फ लिख देती तुम्हें तो.... तुम बस मुझे देखते रह जाते जीती हूँ तुम्हें .... इसलिए तुम पढ़ पाते हो मुझे मैंने यूँ ही .....शब्दों से कहा हैरान हूँ ... लौटे नहीं अब तलक देखो कहीं तुम्हारे आँगन में तो नहीं पसर गए मेरे ये बाँवरे शब्द
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें