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वो इस लिए भी दिलकश बना रहता है क्योंकि ना कहना जानता है।

वो इस लिए भी दिलकश बना रहता है क्योंकि ना कहना जानता है। कांटे पहन लेना इतना भी आसान नहीं ......वो भी सादा सा गुलाब होकर। हूबहू तुम्हारी महक वाला। तुम्हारी चाहना दबाना मुश्किल नहीं पर तुम्हारी महक .... बस वही आसानी से छूटती नहीं। पंखुड़ी पंखुड़ी महक सहेजना अब जरूरत है.... आदत तो तुम्हारी "ना types" वाली ही है ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें