भाषा / Language
कितनी अजीब सी बात है कि मैं सिर्फ़ उसी के लिए लिखती हूँ और य…
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कितनी अजीब सी बात है कि मैं सिर्फ़ उसी के लिए लिखती हूँ और ये कोई नहीं जानता ।वो खुद भी नहीं।
मेरा उस तक कुछ भी पहुंचता नहीं पर मैं अगाध प्रेम में हूँ।
उमींद के सारे बचे टुकड़े सिर्फ मेरे लिए ही तो चमचमाते हैं ।
खुश रहती हूँ बहुत....... हमेशा
डायरी जानती है मेरी l
Thank u Harsh Snehanshu and Anuup Kamal Agrawal जी 💐💐💐💐
In love with your quote .....😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें