भाषा / Language
एक ही उदासी को बार बार जीकर क्या करोगे
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एक ही उदासी को बार बार जीकर क्या करोगे ?
खिड़कियां खोल दो......
इस बयार में कुछ नए अक्षर अभी अभी घुले हैं ।
देखो कोई नया नाम बन जाये ?
या कोई नया चेहरा ?
उदासी एक ही पारी वाली खेली जानी चाहिए
Mandatory for all
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें