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आधी उम्र ख़र्च कर ली तो कुछ मुट्ठी भर दिन हाथ लगे

आधी उम्र ख़र्च कर ली तो कुछ मुट्ठी भर दिन हाथ लगे जो ज़हन में सबूत थे । सुनो! हमने किर्चियाँ बटोरी क्या ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें