भाषा / Language
उदासियों के सूखे पत्ते अक्सर उड़ कर....... बह कर
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उदासियों के सूखे पत्ते अक्सर उड़ कर....... बह कर
कागज़ वाले दरख़्त पर टिक जाते हैं ।
मेरे वाले नज़्म हैं....
तुम चाहो तो कहानी कह लो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें