भाषा / Language
ये मेरे बांवरे रंग
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ये मेरे बांवरे रंग ....
मुझसे मेरी चाहना के रंग ना पूछो
मैं किस -किस रंग में क्या -क्या हूँ ...?
चलो ये बूझो
बहुत सा लाल हूँ
जो अब मलाल नहीं
उतना ही काला
पर मुझमें सवाल नहीं
बहुत सा हरा हूँ
जो कभी पनपा नहीं
उतना ही सुनहरा
जो अभी खनका नहीं
बहुत सा सिंदूरी हूँ
जो कुछ कहता नहीं
उतना ही सफ़ेद
जो चुप रहता नहीं
बहुत सा नीला हूँ
जो लिखा ही नहीं
उतना ही पीला
जो कभी दिखा ही नहीं
बहुत सा भूरा हूँ
पर ये उदास नहीं
उतना ही स्लेटी
जो मेरा उजास कहीं
मेरी चाहनाएँ रंगीली सही ....इन्हें कभी न छोडूं
पक्के रंगों में ......कोई पराया रंग कभी न जोड़ूँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें