कल्पनाशब्दों के बीच
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जी तो बहुत था कि एक कटोरा चाँद तुम्हारे लिए भी बचा लेती

जी तो बहुत था कि एक कटोरा चाँद तुम्हारे लिए भी बचा लेती फिर सोचा ...छोड़ो ! तुम भी तो चकोर से ही हो। रात मुबारक ..... बात मुबारक
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें