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रचना 0988

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क्योंकि तुम ठहर गए हो

क्योंकि तुम ठहर गए हो .... तुम नज़र नहीं नज़रिया हो गए हो l तुमसे न उबर पाउंगी😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें