कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0986

भाषा / Language

मुझसे निकल कर पिछले साल वाले सारे कोरे पन्ने उड़ गए।

मुझसे निकल कर पिछले साल वाले सारे कोरे पन्ने उड़ गए। नई कोरी किताब आज फिर हूँ मैं नई ख्वाइशें ...नया प्रेम ....नई कल्पना सब का एक बार फिर आगाज़ हो। 😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें