भाषा / Language
रचनाएं लिख कर भूल जाने की आदत बुरी है मेरी
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रचनाएं लिख कर भूल जाने की आदत बुरी है मेरी ...
पर facebook तो अच्छा है ना😊😊😊
पिछली दीवाली की रचना आज पकड़ा रहा ... ले संभाल कल्पना कह कर 😊😊😊
आज मेरा शहर बिजली में नहा रहा है ,
हर घर नया सा चमचमा रहा है ,
अपना आँगन हर कोई सजा रहा है ,
मन कितनों ने बुहारा इस बार ?
प्रश्न हर वर्ष का आज भी सता रहा है
रिश्तों को तोहफा सहला रहा है ,
कोई कुछ भी नहीं ,कोई कितना कुछ पा रहा है
अपनी लक्ष्मी हर कोई दूसरे से छिपा रहा है ,
त्यौहार या तृष्णा का कारोबार ?
प्रश्न हर वर्ष का आज भी सता रहा है
किसी का आम दिन ,कोई लाखों उड़ा रहा है
कोई सिर्फ उम्मीद ,कोई ऐश्वर्य दिखा रहा है
चकाचौंध चंहु ओर सही ,
मन के लिए इक मिटटी का
दीया क्यों नहीं?
प्रश्न हर वर्ष का आज भी सता रहा है
कागज़ में रौशनी संग आवाज़ बाँध रहा है ,
खुद आग है और धमाका मांग रहा है ,
खुशियां फैला ,विष नहीं
आग पटाखों को क्यों ?नोटों में क्यों नहीं ?
प्रश्न हर वर्ष का आज भी सता रहा है
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कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें