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सुकून का दिन सुकून की रात से सिर्फ ये कहने के लिए उस क्षिति…

सुकून का दिन सुकून की रात से सिर्फ ये कहने के लिए उस क्षितिज पर मिलता है .... सुनो! कायम रहना। सुकून की रात बस..... "जी हुज़ूर " कहकर दिन के सुकून में समा जाती है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें