कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0937

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सब कुछ तो है मेरे पास

सब कुछ तो है मेरे पास .... बस....... वो अपनी वाली खामोशियों के टुकड़े सरका देते मेरी ओर । कुछ देर ही सही । मैं सुकून की हामी भर देती।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें