मुझ जैसी कई कहानियां रख लेता है तुम्हारा शहर ..... बस.... तुम्हारे सरीखी कविता मुझमें नहीं रुकती।
रचना 093627 अक्टूबर 2017भाषा / Languageहिन्दीEnglishमुझ जैसी कई कहानियां रख लेता है तुम्हारा शहर✦मुझ जैसी कई कहानियां रख लेता है तुम्हारा शहर ..... बस.... तुम्हारे सरीखी कविता मुझमें नहीं रुकती।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें