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रचना 0936

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मुझ जैसी कई कहानियां रख लेता है तुम्हारा शहर

मुझ जैसी कई कहानियां रख लेता है तुम्हारा शहर ..... बस.... तुम्हारे सरीखी कविता मुझमें नहीं रुकती।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें