भाषा / Language
Surjit Singh sir ....आज पुराना पिटारा आपके कहने पर खोल दिया…
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Surjit Singh sir ....आज पुराना पिटारा आपके कहने पर खोल दिया। ये मेरी लंबी लंबी वाली कविताएं😊😊😊
लफ्ज़..........
कुछ तेरे लफ्ज़
कुछ मेरे लफ्ज़
साथ चले
बात कहलाये
बातें करते लफ्ज़ ,
जुड़ गए
जज़्बात कहलाये
जज्बातों में उलझे लफ्ज़ ,
थक गए
खामोश कहलाये
ख़ामोशी में लिपटे लफ्ज़ ,
घुल गए
आगोश कहलाये
आगोश में डूबे लफ्ज़,
बह गए
अदा कहलाये
अदा में रंगे लफ्ज़,
छू गए
अंदाज़ कहलाये
अंदाज़ में ऊँचे लफ्ज़ ,
गूंज गए
आवाज़ कहलाये
आवाज़ में सच्चे लफ्ज़ ,
रुक गए
विचार कहलाये
विचार में पक्के लफ्ज़ ,
मंझ गए
व्यवहार कहलाये
व्यवहार में सिले लफ्ज़ ,
जड़ गए
संस्कार कहलाये
संस्कार में चुभते लफ्ज़ ,
चिढ गए
तिरस्कार कहलाये
तिरस्कार में लड़ते लफ्ज़ ,
गिर गए
बेकार कहलाये
बेकार में कहे लफ्ज़ ,
बिखर गए
चुप्पी कहलाये
चुप्पी में सारे लफ्ज़ खो गए
फिर कहाँ कुछ कहलाये ?
लफ़्ज़ों का शोर थम गया
फिर ये किसने कहा ?
उड़ते लफ्ज़ जब बंध जाएँ ,
कल्पना कहलाये
कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें