मेरी कविता भी रोज़ उसी जगह से टूटती है जहां से तुम्हारी कहानी जुड़ती है। शुक्रिया तुम्हारा😊😊😊😊😊
रचना 091328 सितंबर 2017भाषा / Languageहिन्दीEnglishमेरी कविता भी रोज़ उसी जगह से टूटती है जहां से तुम्हारी कहान…✦मेरी कविता भी रोज़ उसी जगह से टूटती है जहां से तुम्हारी कहानी जुड़ती है। शुक्रिया तुम्हारा😊😊😊😊😊कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें