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रचना 0913

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मेरी कविता भी रोज़ उसी जगह से टूटती है जहां से तुम्हारी कहान…

मेरी कविता भी रोज़ उसी जगह से टूटती है जहां से तुम्हारी कहानी जुड़ती है। शुक्रिया तुम्हारा😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें