कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0878

भाषा / Language

जितना सुकून देते हो उतना ही दुख भी ।

जितना सुकून देते हो उतना ही दुख भी । पर वो क्या है ना.... तुमसे रूठा भी तो नहीं जाता। खट्टे अंगूर ..... मीठी मिश्री संभल जाने तक .... विदा ख्याल रखियेगा। खुला खत...😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें