कल्पनाशब्दों के बीच
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पल नहीं

पल नहीं ..... एक सदी क़ैद है इन आँखों में । संघर्ष .... सादगी....सपनों का काजल काला नहीं ... गहरा भूरा है इनके लिए। कल .....आज और कल बस रुका हुआ सच है .....आंखों से खूबसूरत कागज़ नहीं। खूबसूरत आंखों सा कैमरा नहीं... आज world photography day पर आप सबके साथ Subodh Panchal जी द्वारा एक अद्भुत फ़ोटो ...जो मई, साल 2010 में बाड़मेर राजस्थान में ली गयी थी शेयर कर रहीं हूँ । आपके हुनर को नमन ।💐💐💐💐💐 तस्वीर मुझे छू गई तो कलम चल गई।😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें