कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0870

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तुम चाँद

तुम चाँद ...... तुम्हारे हिस्से का आसमान ..... तुम्हारी नीली चांदनी ...... और तो और ..... ये रात भी सगरी तुम्हारी ...... और मैं ..... मैं तो बस ........मैं इक दिन हो सके ..... तो मेरी अपेक्षाएं भी ......ओढ़ के देखना बेहद ...........अलग लगोगे सिर्फ .....इक बार बस .....यूं ही
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें