शोर..... बस अभी लौटे हैं महफ़िल से मेरे शब्द आते ही बोले .... कल्पना ! मुझे तालियों की गड़गड़ाहट नहीं .... मौन रूहों की आहट सुना दिया करो शोर में जी घबराता है ।