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रचना 0853

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हमेशा पूछा करती थी तुम .... रुक क्यों नहीं जाते

हमेशा पूछा करती थी तुम .... रुक क्यों नहीं जाते ? काश उस दिन ये कह पाता ... जो आज कह पा रहा हूँ .... ज़िन्दगी भर के लिए रोक दिया था तुमने मुझे .... अपनी इस मुस्कान में तब से..... अब तलक आगे भी ना जाने कब तलक.....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें