कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0849

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पहले खुद को गढ़ तो लूँ

पहले खुद को गढ़ तो लूँ.... फिर रचूंगी तुम्हें। हर बार स्वार्थी तुम क्यों रहो?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें