कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0825

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कभी कभी खामोश प्रश्नों का अंबार हमें सोने नहीं देता। उत्तर…

कभी कभी खामोश प्रश्नों का अंबार हमें सोने नहीं देता। उत्तर भी सन्नाटा लिपटे हुए आते हैं। हमें शब्द बीनने पड़ते हैं । माफ़ी और प्रेम कागज़ पर लिखे ये दोनों शब्द कितने बेमानी लग रहे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें