कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0816

भाषा / Language

बहुत बहुत आभार आपका ..... Om Prakash Pal जी

बहुत बहुत आभार आपका ..... Om Prakash Pal जी रायपुर से प्रकाशित अखबार समय का प्रहरी में मेरी कविताओं को स्थान देने का शुक्रिया। 😊😊😊😊 अपनी रत्ती भर राख आज आखिरकार उसने कागज़ पर धर ही दी इक लौ जंगलों तक पैदल पैदल पहुंची फिर दावानल रच दिया शहर आसमान दरिया सब सेंक कर रख दिया वो आज भभकी नहीं .....सूखी घास सी लौ में कुंदन सी दूर तक आंच ले गई आंचल में सुन्दर ....सुर्ख़ ....शब्दों में बेबाक हो गई लोग आहत बेहद आहत कुछ मूक विस्मित भी तुम आज कागज़ पर शब्दों सी प्रखर हो रूमानी अग्नि सी ..... बेहद ठोस स्त्री तुम लिखने लगीं तभी चुभने भी लगीं यलगार हो......
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें