कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
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रचना 0815

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जब हम लिखते हैं तो शब्द होते हैं

जब हम लिखते हैं तो शब्द होते हैं... पढ़ते ही तराजू क्यों हो जाते हैं? खासकर दूसरों का कुछ को तो बाट रखने और खाली तक कर देने की भी बड़ी जल्दी है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें