भाषा / Language
छुट्टियों के बाद स्कूल का पहला दिन और ऐसा तोहफा
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छुट्टियों के बाद स्कूल का पहला दिन और ऐसा तोहफा ...
क्या कहूँ ?
कुछ एहसास बयां नहीं होते ।आंखों में बस जाते हैं।
आज मेरी fb मित्र Anjana Priydarshni जी बिहार से दिल्ली आयी तो अपने परिवार के साथ मुझ से मेरे स्कूल मिलने आई। Anjana Priyadarshini जी और उनकी बहन Archana Priyadarshini जी दोनों मुझे रोज़ पढ़ती हैं।
उनका मेरे लिए स्नेह देख कर लगा .... कल्पना तुम कितनी खुशकिस्मत हो तुम्हारे शब्द रिश्ते बोने लगे।
दोनों बहनें स्वयं इतनी शानदार sketches बनाती हैं।पहली बार उन्होंने मुझे इनबॉक्स की थी मेरी स्केच तो इतनी खुश हुई थी कि क्या बताऊँ? आज उनका ये अनमोल तोहफा मेरे हाथों में है। यकीन मानिए कागज़ पर हूबहू मेरी आँखें धर दी हैं इन्होंने।
उनका ये कह देना की एक कागज पर दो लाइन ही सही अपना लिखा हम दोनों बहनों के लिए अलग अलग दे दीजिए ... मुझे कितना बड़ा सुख दे गया बता नहीं सकती। बहुत खुश हूं।
ईश्वर आपकी सभी चाहनाएँ पूरी करे। आज आपने मुझे यकीन दिलाया कि मैं अपने शब्दों को सही दिशा में ले जा रही। साथ बना रहे। आज का दिन मेरी डायरी में achievement of कल्पना के रूप में दर्ज हो गया।
बहुत बहुत आभार।
शब्दों .... तुम्हारा इश्क़ फब रहा मुझ पर। लिखती रहो कल्पना😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें