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रचना 0787

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ना तुम मुझे इन वादों में मिले

ना तुम मुझे इन वादों में मिले ना उन दावों में मिले तुम मुझे यूं ऐसे ....कैसे से मिले ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें