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रचना 0772

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मेरे पास ढ़ेर सारा अनकहा दुख है ।थक गई हूं

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मेरे पास ढ़ेर सारा अनकहा दुख है ।थक गई हूं .... ला मुझ पर धर दे। सच बोल हां .....हां सोलह आने सच। दो सखियाँ ..... औरत और चाहना के बीच का मौन सम्प्रेषण अब औरत निढाल है और चाहना मृत। संवाद जारी है.....कागज़ पर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें