समन्दर थे तुम और मैं एक चुटकी स्याही आज असमानी मुझ से हुए क्या ?
रचना 076817 जून 2017भाषा / Languageहिन्दीEnglishसमन्दर थे तुम और मैं एक चुटकी स्याही✦समन्दर थे तुम और मैं एक चुटकी स्याही आज असमानी मुझ से हुए क्या ?कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें