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रचना 0768

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समन्दर थे तुम और मैं एक चुटकी स्याही

समन्दर थे तुम और मैं एक चुटकी स्याही आज असमानी मुझ से हुए क्या ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें