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खामोश दस्तकें
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खामोश दस्तकें
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खामोश कल्पनाएं
खामोशी से बेहतर कौन अपने को खामोश करना जानता है। खामोशियाँ रूमानी हैं। आंखों के सामने से गुजरनी चाहिए.....दिल के ठीक बीचों बीच रुके हुए तीर को छूती हुई और लिखी जानी चाहिए बड़बोले कागज़ पर ।
इश्क़ मुकम्मल होगा खामोशियों में ....जज़ीरा सा
फ़िज़ूल है कह देना।
आगे से मत कहना कल्पना।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें