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रचना 0753

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तेरी कहानियां सिरहाने रख कर सो गई

तेरी कहानियां सिरहाने रख कर सो गई....... रात... ख्वाब, ख्वाइश, खलिश, खुश्बू , खुलूस सब हो गई । कहानियां खाली हैं और .......मैं तुम से भर गई। 😊😊😊😊😊याद
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें