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रचना 0752

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सबके हिस्से के चाँद से जरा जरा रूमान खुरचकर वो इश्क़वाली कवि…

सबके हिस्से के चाँद से जरा जरा रूमान खुरचकर वो इश्क़वाली कविता सिल दी है। सिरहाने रखी है। सुबह पहन लेना। सुन रही हो ना याद? 😊😊😊😊😊😊याद कल्पना पांडेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें