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रचना 0749

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खामोशी तो फिर भी बर्दाश्त कर लूँ तुम्हारी

खामोशी तो फिर भी बर्दाश्त कर लूँ तुम्हारी... तुम तो ग़ुम से हो गए । वापस आओ "सांस" 😊😊😊😊😊याद
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें