खामोशी तो फिर भी बर्दाश्त कर लूँ तुम्हारी... तुम तो ग़ुम से हो गए । वापस आओ "सांस" 😊😊😊😊😊याद
रचना 074912 जून 2017भाषा / Languageहिन्दीEnglishखामोशी तो फिर भी बर्दाश्त कर लूँ तुम्हारी✦खामोशी तो फिर भी बर्दाश्त कर लूँ तुम्हारी... तुम तो ग़ुम से हो गए । वापस आओ "सांस" 😊😊😊😊😊यादकल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें