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रचना 0744

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उलझनों तुम रुक तो नहीं रहीं ना

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उलझनों तुम रुक तो नहीं रहीं ना? कहो तो किरायेदार हटा दूँ? किचन में पुलाव बनाते वक्त ये भी पक गया... आप भी चखें।😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें