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रचना 0738

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तुम्हें देख लो तो समुन्दर छू आती हूँ

तुम्हें देख लो तो समुन्दर छू आती हूँ बेशक कहा गया होगा तुम्हें सैंकड़ों बार आज खुद पर लिख कर दे रही हूँ..... तसल्ली हो ....भ्रम नहीं
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें