कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0730

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कविता हूँ मैं

कविता हूँ मैं .... और तुम कहानी से मैं कम कम में तुम्हें छिपाना चाह रही तुम कितने बार में मुझे ज़ार ज़ार बताना । शब्दों का शामियाना भी और दूर तक जाता कालीन भी आस पास महक छिपाने की और बता देने वाली भी तुम मुझमें कितना सारा ग़ुम हो मैं भी पता नहीं कितना रमी हुई कविता में कहानियां लिखी जा रही कहानी में कविताएं बूझी जा रही कल्पना तुम खुश रहो .... तुम्हें तलाशा जा रहा और मेरी कहानी ....तुम .....तुम्हें तराशा जा रहा इश्क़ मुबारक
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें