कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0729

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तुम्हारे बहुत कुछ में

तुम्हारे बहुत कुछ में ....... मेरा भी इत्तु सा कुछ कुछ है। रख के देखो ना... ज़रा सा चख कर देखो ना...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें