कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
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रचना 0723

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इसमें गलत क्या है

इसमें गलत क्या है ....? अगर मैं शब्द हो गई हूं और रोज़ तुम्हारा स्पर्श पाती हूँ..... चाहना और कल्पना के बीच की रूहानी कविता .... मैं और ढ़ेर सारे तुम
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें