इसमें गलत क्या है ....? अगर मैं शब्द हो गई हूं और रोज़ तुम्हारा स्पर्श पाती हूँ..... चाहना और कल्पना के बीच की रूहानी कविता .... मैं और ढ़ेर सारे तुम