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रचना 0713

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ज़िन्दगी....दो मिसरों की ग़ज़ल ही तो है।

ज़िन्दगी....दो मिसरों की ग़ज़ल ही तो है। हम-तुम... दो मिसरे 😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें