कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
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रचना 0708

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उन शब्दों से रूबरू होना अब भी बाक़ी है जो दिखे तो तुम्हारी क…

उन शब्दों से रूबरू होना अब भी बाक़ी है जो दिखे तो तुम्हारी कहानी पर लगे मेरी कविता। कहानी से कविता तक की अनहद गीली नदी ढाई आखर वाली
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें