ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0707

भाषा / Language

मेरी भी खानाबदोशियाँ अब ठहरना चाहती हैं

✦
मेरी भी खानाबदोशियाँ अब ठहरना चाहती हैं ..... लाओ कुछ देर अपना निर्वात मुझे दे दो.... अहा! शब्दों की पनाह कितनी दिलकश है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें