भाषा / Language
आखिरकार
✦
आखिरकार ......
आज निर्भया को अपना मौन मिल ही गया ।
उस दिन लिखी मेरी ये रचना आज तक चुभती थी मुझे
अब थोड़ी राहत है ।
जाओ चिरनिद्रा में सो जाओ। इंसाफ हो जाने तक रुकी रही ये क्या कम है ?
एक सितारा तुम्हारे नाम का कई उमींदों में रुक गया है।तुम ख़ौफ़ बनी रहना दरिंदगी के खिलाफ।
मौन........
सबको मृत्युपरांत
दो मिनट का मौन देते हैं
तुम्हें इतने साल का मौन दे रखा है
इससे ज्यादा
कुछ है ही नहीं
हम
लाचारों के पास
इस बुज़दिल ज़मी पर
रहने से बेहतर हुआ
तुम
उस आसमान में खो गयी
कुछ एक के लिए
अब तक
कराह रही हो
बाकि सब के लिए तो
कब की सो गयी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें