कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0682

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जानती हूँ.... सहरा ही रहोगे तुम

जानती हूँ.... सहरा ही रहोगे तुम इश्क़ का पलाश मुस्कुराता रहे बस.... हमारा ....तुम्हारा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें