भाषा / Language
सैकड़ों पिंजर बद्ध पाखियों को एक साथ आज़ाद कर देने सा सुकून त…
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सैकड़ों पिंजर बद्ध पाखियों को एक साथ आज़ाद कर देने सा सुकून तुम्हारे मुट्ठी भर शब्द दे देते हैं । रूह देखी है कभी?
मैं तो अक्सर तुम्हारे चुभते पन्नों पर मखमल छूती हूँ । ज़िंदा रखने का शुक्रिया।कागज़ भी ज़िन्दगी हो सकता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें