कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0677

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होगा ऐसा भी किसी रोज़

होगा ऐसा भी किसी रोज़.... अपने शब्दों से निकल कर मैं तुम पर जम जाऊंगी । धूल सी नहीं... प्रेम स्याही सी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें