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रचना 0662

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Let's start demanding "streedom" instead of asking freedom

Let's start demanding "streedom" instead of asking freedom. मांगने से किसको क्या मिला है आज तक ? इसलिए नया शब्द "streedom."... यानि मेरी वो सारी न्यूनतम अभिलाषाएं जिसे पूरा किये बिना मुझे पाना क्या .......सोचना भी नामुमकिन होगा। इसे माँगा नहीं जायेगा । यही एक eligibilty होगी बल्कि नींव होगी । पूरा तो मैंने कभी माँगा ही नहीं ।मेरे आधे में अपना आधा जोड़ देने का वादा ।मेरा आधे से इक बून्द भी कम नहीं होने देने का वादा। मेरी हाँ को हाँ और मेरे ना को ना ही समझे जाने का वादा। बीच का सारा vacuum हटा देने का वादा। ढेर सारा संवाद रखने का वादा। मेरी चाहनाओं पर प्रश्न न उठाने का वादा ।मेरे हर उत्तर को समझने का वादा।क्यों ,क्या ,कैसे, किससे ,कब ,कब तलक जैसे शब्दों का हम दोनों के लिए एक जैसा मतलब और प्रयोग करने का वादा। ये वादों की फ़ेहरिश्त प्रतीत हो रही होगी पर वो है ना जब तक line draw करना नहीं आएगा तो प्रारूप क्या दूँगी खुद को। तो बस अब ..... आज़ादी नहीं ...मुझे अपनी शहजादी चाहिए..... streedom is new freedom 😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें