कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
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रचना 0661

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अपने शब्दों का मखमल रख जाओ

अपने शब्दों का मखमल रख जाओ....... इस चाहना को सहला दूं जरा कि तेरी झूठी बातें मैं सारी मान लूँ 😊😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें