कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0653

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आसपास देख कर....... इतना सुनकर ऐसा महसूस होने लगा है कि सार…

आसपास देख कर....... इतना सुनकर ऐसा महसूस होने लगा है कि सारी फुँकार सारा ज़हर बस स्त्री के लिए ही रख छोड़ा है इन ........ ने । सांप बेहतर हैं .... स्त्री पुरुष का फ़र्क़ नहीं रखते डंसने से पहले। 😢😢😢😢😢😢😢😢 तख्ती किताब फेसबुक शब्द सब ओर ज़हर उगल रहा वो कोई .... ज़ाहिर होते हुए सब डर क्यों जाते हैं😊😊😊😊😊 खासकर स्त्री द्वारा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें