भाषा / Language
सिर्फ तुम .......दो लफ्ज़
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सिर्फ तुम .......दो लफ्ज़
दो लफ़्ज़ों से प्रेम रच सकती हूँ .....
सिर्फ तुम
दो लफ़्ज़ों से प्रेम उकेर सकती हूँ .....
सिर्फ तुम
दो लफ़्ज़ों से प्रेम रंग सकती हूँ .....
सिर्फ तुम
दो लफ़्ज़ों से प्रेम लिख सकती हूँ ....
सिर्फ तुम
दो लफ़्ज़ों से प्रेम कह सकती हूँ .....
सिर्फ तुम
दो लफ़्ज़ों से प्रेम जता सकती हूँ .....
सिर्फ तुम
दो लफ़्ज़ों से प्रेम पा सकती हूँ .....
सिर्फ तुम
दो लफ़्ज़ों से प्रेम निभा सकती हूँ .....
सिर्फ तुम
दो लफ़्ज़ों से प्रेम हार सकती हूँ .....
सिर्फ तुम
दो लफ़्ज़ों में जी सकती हूँ .....
सिर्फ तुम
दो लफ़्ज़ों मे रह सकती हूँ ......
सिर्फ तुम
दो लफ़्ज़ों में खो सकती हूँ ......
सिर्फ तुम
दो लफ़्ज़ों में मैं..."मैं"हो सकती हूँ ......
सिर्फ तुम
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें