कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0622

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इश्क़ सीखना

इश्क़ सीखना ..... वो भी उन बचे खुचे कतरों से खुद को ढूँढना..... तुम्हारे उन सबके लिए लिखे जाने वालों शब्दों में उस पन्ने को पहन लेना सर से पाँव तलक फिर गढ़ना इक कविता .... टूटे हुए मोती की .......जो चाँद सा लगता है खुद को इक बार फिर जिला लेना तुम्हारे बचे खुचे इश्क़ के खातिर कागज़ पर ही सही ......
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें